आज काली नदी और उद्गम स्थल अंतवाडा चर्चा में हैं, जिसकी खबर केंद्र सरकार के कानों में भी पड़ रही है. मुज्जफरनगर से सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान के साथ साथ अब जल्द ही जलशक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी काली पुनर्जीवन अभियान में हाथ बंटाने की बात की है. काली नदी को एक बार फिर से अपने उद्गम स्थल पर कलकल बहते देखने के लिए जो मुहिम नीर फाउंडेशन ने शुरू की थी, उसे पहले ग्रामवासियों, फिर प्रशासन और मीडियाकर्मियों ने धीरे धीरे आगे बढ़ाया. अब कहा जा रहा है कि संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत स्वयं मेरठ आएंगे और काली उद्गम स्थल का निरीक्षण करेंगे.


सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान ने भी केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से काली नदी विकास कार्यों के बारे में चर्चा की. उनके साथ साथ अन्य सांसदों व विधायकों ने भी दिल्ली में हुयी इस शिष्टाचार मुलाकात में हिस्सा लिया. विधायक उमेश मलिक, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधायक प्रमोद ऊंटवाल, सांसद कैराना प्रदीप चौधरी सहित अन्य मान्य गणों ने जलशक्ति मंत्री से मिलकर उन्हें अंतवाडा में जारी नदी पुनर्जीवन प्रयासों और शुक्रताल तीर्थ जीर्णोद्धार के विषय में चर्चा की, जिस पर मंत्री जी ने पूरा पूरा सहयोग करने और गंभीरता से कार्य करने का आश्वासन दिया और बताया कि काली के प्रदूषण, अतिक्रमण आदि समस्याओं को लेकर जलशक्ति मंत्रालय गंभीर हैं और जल्द ही नमामि गंगे योजना व जलशक्ति मंत्रालय के सहयोग से नदी को स्वच्छ करने का प्रयास किया जायेगा.


आज भी बहुत से स्थानों पर काली नदी को पाटकर लोगों ने कारखाने, मकान या फिर खेती के लिए ज़मीन कब्जे में ली हुयी है. जिस पर एनजीटी ने सख्त रवैया अपनाते हुए आदेश दिया है कि नदी की जमीन खली कराकर उसकी सीमा निर्धारित की जाये. उन्होंने इस कार्य को सफल करने के लिए सिंचाई विभाग को संज्ञान लेने को कहा है और इसके लिए आईआईटी रुड़की से सहायता मांगी गयी है.

नदी मित्र रमन कांत ने बताया कि एक बार सीमांकन होने के उपरांत वन विभाग के सहयोग से नदी की दोनों ओर पौधारोपण का कार्य सुचारू रूप से कराया जायेगा, जिससे प्राकृतिक रूप से नदी का जलस्तर बढ़ेगा और पुनर्जीवन मिलेगा. काली नदी के बाढ़कृत मैदानों को चिन्हित करने के बाद सिंचाई विभाग पिलर गाड़कर नदी की सीमा निर्धारित कर देगा. आदेशनुसार नदी के दोनों ओर हर 100 मीटर की दूरी पर कंक्रीट के पिलर लगाये जायेंगे, जिन पर आने वाला खर्चा लगभग दो से ढाई करोड़ तक आएगा.

अंतवाडा में उद्गम पर लोगों की आवाजाही जारी है, साथ ही निदेशक रमनकांत ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भी कार्ययोजना पर चर्चा की है, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी. यहां बनने वाले तालाबों की खुदाई का कार्य भी निरंतर जारी है. थोड़े समय के लिए बारिश के कारण नदी कार्य में विलम्ब अवश्य हुआ था, जो अब पुनः उसी रफ़्तार के साथ जारी है.

अंतवाडा में गांववासी अब गांव के संरक्षण की ओर भी ध्यान देने लगे हैं. जब से केंद्रीय राज्यमंत्री ने आदर्श योजना के तहत गांव को गोद लेने की बात रखी है, तभी से ग्रामवासी भी स्वच्छता, जनहित आदि कार्यक्रमों को लेकर संजीदगी के साथ कार्य कर रहे हैं. मंत्री मोहदय के निरीक्षण के दौरान गांव के युवाओं ने खेल के मैदानों को भी साफ़ बनाने की मांग की थी, उन्होंने बताया था कि मैदान के बाहर और अंदर गन्दगी भरी है और कूड़े का ढेर लगा है. इसके बाद से ही ग्रामवासियों ने एकजुटता से कार्य करते हुए मैदान में पसरी गन्दगी को हटाना शुरू कर दिया है. कूड़े और गोबर का अंबार धीरे धीरे हटने लगा है, जिससे जल्द ही खेल का मैदान साफ़ हो जायेगा.

इसके साथ ही ग्रामवासी नदी खुदाई के साथ साथ ही पौधारोपण, नदी पूजन जैसे कार्यों में भी भागीदारी कर रहे हैं. उन्होंने नदी को देखने के लिए दूर-दराज से आ रहे लोगों के लिए किनारे पर आरामशाला के रूप में झोपडी का भी निर्माण किया है. हाल ही में संपन्न हुयी पंचायत में भी ग्रामवासियों ने हरसंभव सहायता की बात रखी.

वहीं काली नदी के उद्धार के लिए किये जा रहे प्रयासों और नदी धारा को देखने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी श्री शिव प्रेमानंद जी महाराज नंगली तीर्थ हरिद्वार से नदी उद्गम स्थल अंतवाड़ा गांव पहुंचे. उन्होंने नदी पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा तथा एक ऐतिहासिक व सुंदर कार्य का बीड़ा उठाने के लिए नीर फाउंडेशन और उपस्थित सभी जनों को धन्यवाद दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि नंगली आश्रम भी इस पुनीत क्रम में पूर्ण सहयोग करेगा, ताकि काली फिर अविरल बनकर प्रवाहित हो सके.



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