गत शुक्रवार अंतवाडा गाँव के लिए बेहद खास रहा, जहां रिमझिम होती बारिश से काली के जलस्तर को इजाफ़ा मिला तो वहीं शूटर दादियों के अंतवाडा, काली नदी के उद्गम स्थल पर आने से ग्रामवासियों में काफी चहल-पहल दिखाई दी. एक नदी के पुनर्जीवित हो उठने से अंतवाडा को भी जैसे नवजीवन मिल गया है, दूर-दूर से लोग यहां पहुंचकर नदी के उद्धार के लिए प्रयास कर रहे हैं. इन सभी प्रयासों से एक बात तो स्पष्ट है कि समाज यदि चाहे तो सब संभव है.

नीर फाउंडेशन के सार्थक प्रयासों का असर है कि काली नदी के उद्धार के लिए अब प्रशासन भी गंभीर है और आमजन भी. बीते शुक्रवार को बागपत क्षेत्र के जोहड़ी गांव से आई शूटर खिलाडी दादी प्रकाशो तोमर और चंद्रो तोमर नदी के उद्गम स्थल पर भ्रमण के लिए पहुंची. उन्होंने यहां श्रमदान करने के साथ साथ पौधारोपण भी किया और साथ ही समाज को जागरूक करते हुए कहा कि यदि हम सच्चे मन से कुछ चाहे तो लक्ष्य को पूरा करना आसान हो जाता है और ऐसा ही कुछ आज रमन कान्त भी कर रहे हैं, जिसके लिए उनकी जितनी सराहना की जाये कम है. इसके साथ ही दादियों ने बताया कि हमने आज तक काली यानि कि नागिन नदी के बारे में केवल भूगोल की किताबों में ही पढ़ा है, पर कभी देखा नहीं. साथ ही उन्होंने बताया कि आज तक उन्होंने जमीन से स्वत: प्रस्फुटित किसी नदी को नहीं देखा था पर आज काली के दर्शन करके वह इच्छा भी पूरी हो गयी.

ग्रामीणों के सहयोग को माना आवश्यक


शूटर दादियों में काली पर श्रमदान करते हुए फावड़ा चलाया और साथ ही पौधारोपण करते हुए कहा कि नदी कल्याण की इस मुहिम में ग्रामीणों की भूमिका अहम है और उनके सहयोग से ही इस मुहिम को बल मिलेगा. बारिश के बीच ग्रामीणों ने शूटर दादियों का स्वागत किया और संकल्प लेते हुए कहा कि वे नदी संरक्षण के लिए प्रयासरत रहेंगे. दोनों दादियों ने गांव में शूटिंग के प्रति जिज्ञासा रखने वाले बच्चों को आशीर्वाद दिया और समर्पण के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

शिक्षा से खुलते हैं विकास के द्वार


प्रख्यात शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर ने माना कि लड़कियों का शिक्षित होना बेहद आवश्यक है, इसके लिए उनके परिवारों को प्रयास करने चाहिए क्योंकि बेटियां समाज को सुधारने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. शिक्षा से ही विकास के द्वार खुलते हैं. साथ ही शूटिंग में लड़कियों को अपना करियर बनाना चाहिए, यह उनके लिए बहुत अच्छा विकल्प है जो उन्हें शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत बनाता है. साथ ही उद्गमस्थल पर मौजूद सभी बच्चों से दादियों ने विशेष रूप से कहा कि सभी बच्चे लगन के साथ पढाई करे और देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें.

नागिन नदी को दिखायेंगे परदे पर


अंतवाडा में दादियों के साथ साथ देहाती फिल्मों के प्रसिद्द कलाकार विकास बालियान भी पहुंचे, जो बहुत सी प्रसिद्द देहाती फिल्मों में कार्य कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण का यह अभियान वास्तव में लोगों को संदेश दे रहा है कि हमें कैसे अपनी नदियों को बचाना है. साथ ही उन्होंने कहा कि जल्द ही वह अपनी अगली फिल्म में काली नदी को भी दर्शाएंगे जिससे समाज में जागरूकता का संदेश तो जायेगा ही साथ ही बहुत से लोग नदी से जुडाव महसूस कर पाएंगे. उनके कथन के बाद ग्रामवासी खासे उत्साहित दिखे.

विकास बालियान ने नदी मित्र रमनकांत के कार्यों क सराहना करते हुए कहा कि वह रियल लाइफ हीरो हैं जिन्होंने अपने प्रयासों से एक खोयी नदी को पहचान दिलाई और उसके संरक्षण के लिए जुटें हैं. आज अंतवाडा गांव को राष्ट्रीय स्तर पर जो भी पहचान मिल रही है, उसमें रमन कांत का योगदान अग्रणीय है. उन्हें आमजन का सहयोग और समर्थन ऐसे ही मिलता रहा तो काली को जीवन जरुर मिलेगा.

नदी का कार्य एक वर्ष में हो जायेगा पूर्ण - रमन कांत


कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती..इसी मंशा के साथ लगातार नदी कल्याण में आगे बढ़ रहे हैं रमनकांत. उन्होंने उपस्थित अतिथियों और मीडियाकर्मियों को नदी के इतिहास की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि अंतवाडा में नागिन नदी को पुनः प्रवाहित करना उनका सपना है, जिसे पूर्ण करने के क्रम में वह प्रयासरत हैं, नदी को जीवन देने के लिए उसकी खुदाई और अतिक्रमण से मुक्त कराने के प्रकल्प जारी है. इसके साथ ही नदी को संरक्षित रखने के उद्देश्य से उसके सौंदर्यीकरण के प्रयास भी ग्रामवासियों के सहयोग से जारी है. जल्द ही प्रशासन से भी उचित सहयोग मिलना शुरू हो जायेगा, जिसके बाद एकवर्ष के अन्दर ही नदी का कार्य पूरा हो जायेगा.



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